meet parmar

December 27, 2018

मैं कविता कैसे लिखता हूं.

मैं कविता कैसे लिखता हूं? खिड़कियों पे एक चहेरा सजा हुआ होता हैं, उसका ! खिलती सुबह को वो देखते है, और में उनको खिलता देखता […]
May 1, 2018

इश्क़ हर जगह है!

इश्क़ हर जगह है! इश्क़ हर तरफ छाया हुआ है किसी आसमान की तरह. इश्क़ हर तरफ बिछा हुआ है किसी ज़मीन की तरह. इश्क़ हर […]
March 9, 2018

ભલાકાકાની ભડવાઈ

સવાર પડતાજ એક કુંવારીકાની સિટીએ મને જગાડ્યો. i mean મમ્મી એ કૂક્કર મા દાળ બાફવા મૂકી હતી,એ કૂક્કર ની સિટીની વાત છે.બાકી આપાડા કેસમા એવુ છે […]